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किराएदार आसान किस्तों पर खरीद सकेगा अब किराए का मकान, मोदी सरकार ला रही है नई रेंटल पॉलिसी

मोदी सरकार नई रेंटल पॉलिसी लान रही है। इस नई पॉलिसी के तहत शहरों में आने वाले लोगों के लिए सरकारी संस्थाओं से मकान किराए पर लेने की सुविधा होगी।

Ankit Tyagi | Apr 21, 2017 | 10:05 AM
किराएदार आसान किस्तों पर खरीद सकेगा अब किराए का मकान, मोदी सरकार ला रही है नई रेंटल पॉलिसी

नई दिल्ली।  केंद्र की मोदी सरकार नई रेंटल पॉलिसी लाने की तैयारी में है। इस नई पॉलिसी के तहत शहरों में आने वाले लोगों के लिए सरकारी संस्थाओं से मकान किराए पर लेने की सुविधा होगी। साथ ही, फ्यूचर में उनके पास इस किराये के मकान को ही आसान किस्तों में पूरी कीमत चुकाकर खरीदने का ऑप्शन भी होगा।

 स्कीम का नाम होगा ‘रेंट टू ओन

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शहरी विकास मंत्रालय ने नई रेंटल पॉलिसी की तैयारी पूरी कर ली है। इस नई पॉलिसी में किराएदार को मकान खरीदने के लिए बनाई नई स्कीम का नाम नाम ‘रेंट टू ओन’ है। जिसे सेंट्रल गवर्नमेंट की नेशनल अर्बन रेंटल हाउसिंग पॉलिसी के तहत लॉन्च किया जाएगा। केंद्रीय शहरी विकास एंव आवास मंत्री वेंकैया नायडू ने गुरुवार को कहा कि इस ऐक्ट को मंजूरी के लिए जल्दी ही कैबिनेट के समक्ष पेश किया जाएगा। यह भी पढ़े: कैश मैनेजमेंट कंपनियों में 100 फीसदी FDI की मिलेगी छूट, सरकार जल्‍द करेगी औपचारिक ऐलान

किराएदार ऐसे खरीद सकेगा अब किराए का मकान

इस स्कीम के तहत शुरुआत में कुछ निश्चित वर्षों के लिए घर लीज पर दिया जाएगा। खरीददार को प्रति माह ईएमआई के बराबर किराया बैंक में जमा करना होगा, इसमें कुछ किराये के तौर पर होगा और बाकी जमा होगा। खरीददार की ओर से जमा की गई ईएमआई की राशि जब 10 फीसदी के स्तर पर पहुंच जाएगी तब मकान उसके नाम पर रजिस्टर हो जाएगा। यदि लीज पर लेने वाला व्यक्ति रकम जमा नहीं कर पाता है तो सरकार इस मकान को दोबारा बेच देगी। इसके अलावा किराये के साथ जमा की जाने वाली राशि किरायेदार को बिना ब्याज के वापस लौटा दी जाएगी। यह भी पढ़े: मोदी सरकार के कोयला सेक्टर में किए सुधारों का दिखा असर, सुधरी आपूर्ति कम हुए बिजली के दाम

गरीब लोगों को मिलेगी 1.5 लाख रुपए की सब्सिडी

सरकार निजी जमीन पर बने मकानों को खरीदने पर भी गरीब तबके के लोगों को 1.5 लाख रुपए की सब्सिडी देने पर विचार कर रही है। अब तक यह छूट राज्य सरकारों एवं निकायों की जमीन पर बने आवासों पर ही दी जाती थी। वेंकैया नायडू ने कहा कि प्राइवेट डिवेलपर्स की ओर से लॉन्च किए गए अफोर्डेबल हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स के उद्घाटन के बाद से ही मंत्रालय इस पर विचार कर रहा था। उन्होंने कहा कि अब तक हम 2008 शहरों और कस्बों में 17.73 लाख शहरी गरीबों के लिए आवासों को मंजूरी दे चुके हैं। यह भी पढ़े: मोदी सरकार की मेहनत लाई रंग, नोटबंदी के बाद से डिजिटल लेनदेन 23 गुना बढ़ा

नए रेंट एक्ट से दूर होगा मकान मालिको का डर

मौजूदा समय में रेंटल पॉलिसी बहुत पुरानी है और वह किराएदारों के पक्ष में है इसीलिए लोग घर किराए पर देने से कतराते हैं। सरकार चाहती है कि जिन लोगों ने मकान खरीदे हैं, अगर वे खुद उसमें नहीं रहते तो वे किराए पर दे दें ताकि उनका सदुपयोग तो हो सके। अगर ऐसा होता है तो कई शहरों में तो मकानों की समस्या ही खत्म हो जाएगी। सरकार ऐसा मॉडल अग्रीमेंट तैयार करेगी, जो मकान मालिक और किराएदार आपसी सहमति से करेंगे। इसमें किराए की राशि और अवधि तय की जाएगी। इससे सुनिश्चित किया जाएगा कि मकान मालिक का मकान सुरक्षित रहेगा।

आंकड़ों पर एक नजर

2011 की रिपोर्ट के मुताबिक देश में ऐसे 1 करोड़ 10 लाख मकान खाली पड़े हैं। नई पॉलिसी में सरकार मॉडल रेंट अग्रीमेंट तैयार करेगी। इसमें सुनिश्चित होगा कि मकान मालिक का मकान सुरक्षित रहे। राज्य सरकारों से किराए पर मकान देने वालों को घरेलू दरों पर बिजली, पानी और हाउस टैक्स देने को कहा जाएगा। सरकार की पॉलिसी सफल रही तो कई शहरों में मकानों की समस्या ही खत्म हो जाएगी।

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