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एडीबी ने अमेरिका और यूरोप में संरक्षणवाद को बताया चिंताजनक, मुक्त व्यापार सभी के लिए फायदेमंद

ADB ने कहा कि अमेरिका और यूरोप में व्यापार को लेकर संरक्षणवाद का उभार चिंताजनक है, हालांकि यह इतना वास्तविक नहीं कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को अलग अलग कर दे।

Dharmender Chaudhary | May 3, 2017 | 4:51 PM
एडीबी ने अमेरिका और यूरोप में संरक्षणवाद को बताया चिंताजनक, मुक्त व्यापार सभी के लिए फायदेमंद

योकोहामा। एशियाई विकास बैंक (ADB) ने कहा कि अमेरिका और यूरोप में व्यापार को लेकर संरक्षणवाद का उभार चिंताजनक है, हालांकि यह इतना वास्तविक नहीं है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को अलग अलग कर दे। एडीबी की 50वीं सालाना आम बैठक के लिए वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की बैठक हो रही है। यह भी पढ़ें: पीएम मोदी इस खास गाड़ी से पहुंचे केदारनाथ मंदिर, आप भी खरीद सकते हैं इसे

बैठक से एक दिन पहले एडीबी के मुख्य अर्थशास्त्री यासुयुकी सावादा ने कहा कि यह कहना मुश्किल है कि संरक्षणवाद अच्छा है या बुरा और वह इस पर अपनी राय व्यक्त नहीं करना चाहेंगे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, मेरी राय में एडीबी का रूख है कि अधिक मुक्त व्यापार व अधिक मुक्त निवेश माहौल सभी देशों व अर्थव्यवस्थाओं के लिए फायदेमंद होगा। इस संबंध में, मेरा मानना है कि हमें और अधिक मुक्त या खुली व्यापार प्रणाली का समर्थन करना चाहिए।

सावादा ने चीन का उदाहरण दिया जो कि निर्यात केंद्रित आर्थिक मॉडल से और अधिक आंतरिक मांग आधारित मॉडल की ओर जा रहा है। सावादा के अनुसार उनका मानना है कि एशिया में यह रूख देखने को मिल रहा है कि घरेलू खपत और निवेश बाह्य मांग से कहीं अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हालांकि, यह रूख व्यापार की महत्ता को नकारता नहीं है। यह भी पढ़ें: RTI से हुआ बड़ा खुलासा: IRCTC ने 100 ग्राम दही 972 रुपए में और एक लीटर रिफाइंड 1241 रुपए में खरीदा

संरक्षणवाद पर एडीबी के कतिपय नरम रूख संबंधी सवाल को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि एडीबी का जोर सभी देशों में और अधिक खुले व्यापार व पूंजीगत सामान के अधिक मुक्त आवागमन पर है। उन्होंने कहा कि एडीबी को मुक्त व्यापार निवेश प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। सावादा ने कहा, अमेरिका और यूरोप में नए रूख का उभार थोड़ी चिंताजनक स्थिति है। हालांकि, मेरी राय में यह कहना वास्तविकता से दूर जाना होगा कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था टूटने जा रही है।

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