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डिजिटल और इंटरनेट बैंकिंग के दौर में धोखाधड़ी की संभावना है ज्‍यादा, इससे बचने के हैं ये 10 उपाय

जिस प्रकार हम यह सुनिश्चित करते हैं कि सारे ताले ठीक से बंद हैं ताकि चोरी न हो, उसी प्रकार छोटी-छोटी सावधानियां हमें एक बड़ी धोखाधड़ी से बचा सकती हैं।

Manish Mishra | Dec 14, 2016 | 12:40 PM
डिजिटल और इंटरनेट बैंकिंग के दौर में धोखाधड़ी की संभावना है ज्‍यादा, इससे बचने के हैं ये 10 उपाय

नई दिल्‍ली। नोटबंदी के बाद बैंकों में डिपॉजिट कराने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। वहीं, डिजिटल पेमेंट पर फोकस बढ़ने से ठग भी फोन और कई तरीकों से लोगों के बैंक अकाउंट में सेंध लगा रहे है। हालांकि आज सभी बैंक एवं वित्तीय संस्‍थान अपने ग्राहकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठा रहे हैं, परंतु अपने पैसे की सुरक्षा के उपायों को अपनाने का उत्तरदायित्व हमारा अपना ही है। क्‍योंकि अंतत: हानि हमारी ही होती है। जिस प्रकार घर से जाते समय हम यह सुनिश्चित करते हैं कि सारे ताले ठीक से बंद हैं ताकि चोरी न हो सके, उसी प्रकार निम्नलिखित छोटी-छोटी सावधानियां हमें एक बड़े नुकसान से बचा सकती हैं।

अपने पिन नंबर और पासवर्ड को सुरक्षित रखें

अधिकांश वित्तीय लेन-देन के लिए एक पिन नंबर या पासवर्ड का उपयोग करना अनिवार्य है। उनके उपयोग के समय विशेष सावधानी रखें और इन्हें कभी भी किसी भी व्यक्ति पर उजागर न होने दें। यदि आप इसे परिवार के किसी सदस्य के साथ बांटना भी चाहते हैं तो यह कार्य किसी सार्वजनिक स्थान पर ना करें। इसे पूर्ण रूप से गुप्त रखने में ही समझदारी है ।

पासवर्ड को नियमित रूप से बदलें

आपकी आय तथा धन संबंधी सूचना की सुरक्षा के लिए आपको साल में कम से कम एक या दो बार अपने बैंक खातों तथा ऐसे अन्य ऑनलाइन खातों का पासवर्ड अवश्य बदलना चाहिए। कभी भी अपना या अपने परिवार के सदस्यों की जन्म तिथि को पासवर्ड न रखें क्योंकि छल करने वाले व्यक्ति इसे सरलता से ढूंंढ सकते हैं। विशिष्ट एवं कठिन पासवर्ड का प्रयोग करें जिसका अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल हो।

अपने पासवर्ड कभी भी फोन में स्टोर करें

कुछ लोगों को शायद फ़ोन में अपने पासवर्ड, डेबिट कार्ड के पिन इत्यादि को सहेज कर रखने में सुविधा लगे लेकिन इससे दुरुपयोग की संभावना बढ़ जाती है। बेहतर है कि आप अपने पासवर्ड याद रखें। आपका फ़ोन अगर गलत हाथों में पड़ गया तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। ये सभी पासवर्ड तथा ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी को कभी अपने कंप्यूटर या लैपटॉप में भी न रखें ।

ऑनलाइन खरीदारी के लिए मोबाइल पर्स का प्रयोगकरें

यदि आप ऑनलाइन सामान खरीदते हैं तो क्रेडिट या डेबिट कार्ड के स्थान पर मोबाइल पर्स का प्रायोग उचित रहेगा क्योंकि लगभग सभी वेबसाइट क्रेडिट और डेबिट कार्ड के विवरण को संचित कर रखती हैं। यद्यपि प्रतिष्ठित वेबसाइट्स आपकी इस महत्वपूर्ण जानकारी को बेहतर तरीके से सुरक्षित रखने का प्रयास करती हैं लेकिन किसी ऑनलाइन हैकर द्वारा आपकी इस जानकारी को प्राप्त करने की आशंका हमेशा रहेगी। दूसरी ओर मोबाइल पर्स आपकी इस जानकारी को संचित नहीं करते ।

छल करने वाली ईमेल का जवाब दें

आपको कई ऐसी ईमेल भी मिलेंगी जो पुरस्कार के लालच में आपसे अपनी व्यक्तिगत जानकारी भेजने के लिए कहेंगी। ऐसी छल करने वाली ईमेल शिकार ना बनें और किसी भी व्यक्तिगत जानकारी जैसे नाम, बैंक खाता, घर एवं दफ्तर का पता इत्यादि कभी भी ना दें। पुरस्कार के साथ-साथ ऐसी ईमेल जिसमें आपको किसी मृत अथवा बीमार आदमी की वसीयत में नाम होने अथवा कानूनी तौर पर एक बड़ी राशि आपके बैंक कहते में डालने की बात लिखी गई हो तो समझ लें कि आपको फसाने का मौका ढूंढ जा रहा है।

फ़ोन पर मांगी जानने वाली जानकारी से सावधान

संभव है कि आपसे फ़ोन पर जानकारी मांगी जाए। पेशेवर धोखेबाज फ़ोन पर किसी बैंक कर्मचारी या सरकारी अधिकारी बनकर आपसे निजी जानकारी लेने का प्रयास कर सकते हैं । ऐसी फ़ोन कॉल से सावधान रहें और किसी भी तरह की जानकारी इन्हें न दें। याद रखे कोई भी बैंक कर्मचारी या सरकारी अधिकारी आपसे आपके पासवर्ड, पिन नंबर, बैंक खाते का नंबर आदि कभी नहीं मांगेंगे। कोई भी ऐसी जानकारी फ़ोन पर देना आपके लिए बहुत हानिकारक हो सकता है ।

बिना समझे निवेश करें

हर निवेशक अच्छे लाभ की उम्‍मीद करता है लेकिन यदि कोई निवेश आपको थोड़े ही समय में बड़े फायदा प्रदान करने की सम्भावना देती है तो निवेश न करना ही लाभदायक हो सकता है। यह जानना आवश्यक है कि निवेश से होने वाले लाभ तुरंत नहीं मिलते। निवेश से लाभ का पहला नियम लंबी अवधि तक निवेश करना है। तुरंत लाभ के लालच में आपकी पूंजी समाप्त भी हो सकती है। दूसरा नियम है कि आप वित्तीय कम्पनी के ऐतिहासिक स्थायित्व, लाभ निष्पादन आदि का अध्ययन अवश्य करें। अंत में बिना निवेश की योजना को अच्छी तरह समझे अपनी पूंजी उसमें न लगाएं ।

सामाजिक मीडिया प्लेटफॉर्म के जोखिम से सावधान

हर चीज़ के दो पहलू  होते हैं, एक अच्छा और एक बुरा। ये आवश्यक है कि हम दोनों पहलुओं को भली-भांति समझें। सोशल मीडिया ने अन्य लोगों के साथ हमारे संपर्क का तरीका ही बदल दिया है । आज हम पूूरे विश्व में  किसी भी व्यक्ति के साथ जुड़े रह सकते हैं। परंतु यह सोशल मीडिया हम सभी को धोखाधड़ी का शिकार भी बना सकता है। आए दिन हैकर्स सोशल मीडिया पर उपलब्ध निजी जानकारी को प्राप्त करने के प्रयास करते हैं। इसलिए बेहतर यह होगा कि आप न तो अपनी संवेदनशील जानकारी सोशल मीडिया पर रखें और न ही ऐसी किसी लिंक पर जाएं जो आपको आकर्षक लाभ देने का वादा करे। संभवतः यह फिशिंग की प्रक्रिया है जो आपको धोखा देने की प्रक्रिया की शुरुआत भी हो सकती है।

सार्वजानिक वाईफाई पर बैंकिंग या शॉपिंग

आज कई स्थानों पर निःशुल्क वाई-फाई मिलता है। ऐसे स्थानों पर किसी भी प्रकार की बैंकिंग और शॉपिंग का काम न करने में ही समझदारी है क्योंकि ऐसे वाई-फाई पर किसी हैकर के शिकार बनने की आशंका हमेशा ही रहती है ।

धोखे का शिकार बनने पर तुरंत कार्यवाही करें

अंत में, यदि दुर्भाग्यवश आप वास्तव में एक वित्तीय धोखाधड़ी के शिकार होते हैं तो बिना किसी विलम्ब के इसे तुरंत सूचित करें। ऐसे में पुलिस को घटना की अविलंब जानकारी देने से धोखेबाज़ के पकड़े जाने और आप के पैसे वापस मिलने की संभावना हो सकती है।

लेखक : श्री अरुण राममूर्ति, निदेशक, क्रेडिट सुधार

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