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सूरत के एक हीरा कारोबारी ने दिया कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, 125 इम्प्लॉइज को तोहफे में दी स्कूटी

सूरत के हीरा कारोबारी लक्ष्मीदास वेकारिया फिर से एक बार चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने अपने 125 कर्मचारियों को तोहफे में स्कूटी दी है।

Ankit Tyagi | Apr 21, 2017 | 12:06 PM
सूरत के एक हीरा कारोबारी ने दिया कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, 125 इम्प्लॉइज को तोहफे में दी स्कूटी

नई दिल्ली। सूरत के हीरा कारोबारी लक्ष्मीदास वेकारिया फिर से एक बार चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने अपने 125 कर्मचारियों को तोहफे में स्कूटर दिए है। लक्ष्मीदास ने अपने कर्मचारियों की परफॉर्मेंस से खुश होकर उन्हें यह तोहफा दिया है।

एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित कर बांटे गए तोहफे

एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया था जिसमें स्कूटी बांटी गई। हर स्कूटी पर एक तिरंगा भी लगाया गया था। आपको बता दें कि वेकारिया ने 2010 मे हीरे तराशने की फैक्ट्री शुरू की थी। हालांकि, गुजरात में ऐसा करने वाले वेकारिया अकेले नहीं हैं। इससे पहले हीरा कारोबारी सवजी भाई ढोलकिया ने भी कर्मचारियों को बड़े तोहफे देकर सुर्खियां बटोरी थी। यह भी पढ़े:CM योगी के इस फैसले से निवेशक हुए मालामाल, 30 दिन में मिला 56 फीसदी का बड़ा रिटर्न

कारोबारी ढोलकिया ने दीवाली पर गिफ्ट में दिए थे 400 फ्लैट्स और 1260 कारें 

सवजी भाई ढोलकिया ने पिछले साल हरे कृष्णा एक्सपोर्ट्स के इम्प्लॉइज को दिवाली बोनस के तौर पर 400 फ्लैट्स और 1260 कारें गिफ्ट की थीं. इस दौरान कंपनी ने 51 करोड़ रुपये खर्च किए थे. 56 वर्कर्स में ज्वेलरी भी बांटी गई थी। यह भी पढ़े: ट्रेन में रेलवे खत्म करेगी AC-2 कोच, बेसिक किराए में हो सकती है 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी

सावजीभाई ने तीन साल पहले शुरू की थी परंपरा

हरे कृष्णा एक्सपोर्ट्स के मालिक सावजीभाई ने 2013 में इस ट्रेंड की शुरुआत की थी जब उन्होंने अपने 1260 कर्मचारियों को गाड़ी गिफ्ट में दी थी। नए साल के बोनस के रुप में कुल 1200 डेटसन रेडी देने का ऐलान किया और डेटसन की ओर से एक दिन में ही 650 गाड़ियों को डिलिवरी कर दी. गिफ्ट की गई गाड़ियों में सभी गाड़ियों के चारों ओर तिरंगे रंग के रंगों से कवर किया गया था। यह भी पढ़े: किराएदार आसान किस्तों पर खरीद सकेगा अब किराए का मकान, मोदी सरकार ला रही है नई रेंटल पॉलिसी

कौन है सवजीभाई

गुजरात के दुधाला गांव के रहने वाले सवजीभाई ने 1977 में 12.50 रुपए लेकर अमरेली से सूरत आये थे. सूरत में सवजीभाई ने 1977 में बतौर हीराधीश अपनी जिंदगी की शुरुआत की थी और उस वक्त महीने में उन्हें 169 रुपये पगार के तौर पर मिलते थे। जिस कंपनी में वो काम करते थे उसी कंपनी के मालिक बन गए.

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