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मुखौटा कंपनियों के मामले में सिनेमा जगत, बिल्डर और ब्रोकर जांच के घेरे में, Sebi ने तेज की कार्रवाई

Sebi ने उन 331 सूचीबद्ध इकाइयों को कारण बताओ नोटिस दिया है जिन पर मुखौटा कंपनियों के रूप में धन के लेन-देन का काम करने का संदेह है।

Manish Mishra | Aug 13, 2017 | 7:15 PM
मुखौटा कंपनियों के मामले में सिनेमा जगत, बिल्डर और ब्रोकर जांच के घेरे में, Sebi ने तेज की कार्रवाई

नई दिल्ली। बाजार नियामक (Sebi) ने कालाधन मामले में कार्रवाई तेज कर दी है। इस मामले में बिल्डर, ब्रोकर और सिनेमा जगत से जुड़ी इकाइयां भी जांच के घेरे में आई हैं। अवैध धन को वैध बनाने में विभिन्न इकाइयों की भूमिका का पता लगाने के लिये कई जांच एजेंसियां सैकड़ों संदिग्ध मुखौटा कंपनियों की जांच में जुटी हैं। नियामक तथा सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (Sebi) ने उन 331 सूचीबद्ध इकाइयों को कारण बताओ नोटिस दिया है जिन पर मुखौटा कंपनियों के रूप में धन के लेन-देन का काम करने का संदेह है। इसके अलावा 100 गैर-सूचीबद्ध इकाइयों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की गयी है जिन पर अवैध धन को सफेद बनाने के लिये शेयरों में काम करने का संदेह है।

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Sebi ने संदिग्ध मुखौटा कंपनियों के शेयरों में कारोबार पर पाबंदी का निर्णय किया लेकिन कुछ कंपनियों ने इस मामले को प्रतिभूति एवं अपीलीय न्यायाधिकण (SAT) में चुनौती दी। न्यायाधिकरण ने इन कंपनियों के पक्ष में फैसला सुनाया और मामले में जांच आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन्होंने प्रतिभूति नियमों का उल्लंघन किया है या नहीं।

इनमें से कई कंपनियों ने सार्वजनिक रूप से बयान जारी कर किसी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार किया और जोर देकर कहा कि वे मुखौटा कंपनियां नहीं हैं। एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि मुखौटा कंपनियों की श्रेणी में रखे जाने से गलत धारणा बनी है कि कुछ बड़ी कंपनियां भी मनी लांड्रिंग तथा अवैध धन को वैध बनाने के लिये मंच उपलब्ध कराकर मुखौटा कंपनी के रूप में काम कर सकती हैं। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि कई छोटे ब्रोकर संदिग्ध मुखौटा कंपनियों की सूची में है। उनके बड़े ब्रोकरेज समूह से जुड़ाव की जांच Sebi कर रहा है।

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उसने कहा कि कुछ ब्रोकरों की भूमिका जांच के घेरे में आने से शेयर बाजार में अफरा-तफरी जैसी स्थिति है। Sebi की 331 कंपनियों के शेयरों के कारोबार पर प्रतिबंध के निर्णय से बाजार में घबराहट बनी हुई है। Sebi के इस कदम से अल्पांश शेयरधारकों के हितों की रक्षा होगी। Sebi के अलावा इन कंपनियों की जांच आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय तथा गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय भी कर रहे हैं। इनमें से कई कंपनियों पर नोटबंदी के बाद नकदी लेन-देन में शामिल होने का भी संदेह है।

अधिकारियों ने आधिकारिक दस्तावेज तथा शुरुआती जांच में प्राप्त तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि करीब 500 इकाइयों (सूचीबद्ध और गैर-सूचीबद्ध) की जांच की जा रही है लेकिन उनमें से कुछ के नाम अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसका कारण मामले की संवेनशीलता और जांच प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करना है। बड़ी संख्या में जिन कंपनियों ने मुखौटा कंपनियों के रूप में काम किया, वे जमीन-जायदाद, कमोडिटीज और शेयर ब्रोकिंग, फिल्म और टेलीविजन, प्लांटेंशन और गैर-बैंकिंग वित्तीय सेवाओं से संबद्ध इकाइयों से जुड़ी हैं। संदिग्ध कंपनियों से इन संपर्कों और सभी संदिग्ध लेन-देन के बारे में बताने को कहा गया है।

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