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NSE की कंप्यूटरजनित खरीद-बिक्री प्रणाली में खामियों की जांच तेज, शीर्ष अधिकारी भी दायरे में

RBI और SEBI ने NSE की कंप्यूटरजनित प्रतिभूति खरीद-बिक्री प्रणाली में खामियों की जांच तेज कर दी है।

Manish Mishra | May 29, 2017 | 8:33 AM
NSE की कंप्यूटरजनित खरीद-बिक्री प्रणाली में खामियों की जांच तेज, शीर्ष अधिकारी भी दायरे में

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और बाजार नियामक SEBI ने NSE की को-लोकेशन कंप्यूटर सर्वर के लिए साझा परिसर सुविधा के माध्यम से की जाने वाली कंप्यूटरजनित प्रतिभूति खरीद-बिक्री प्रणाली में कथित खामियों की जांच तेज कर दी है। इसमें बोर्ड के सदस्य और पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवि नारायण समेत कुछ अन्य शीर्ष अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं। सूत्रों के अनुसार वित्त मंत्रालय इस पूरे मामले पर करीब से नजर रखा है। वह चाहता है कि बाजार नियामक SEBI तेजी से इस जांच को निपटाए क्योंकि इसमें कारोबार के हिसाब से देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज शामिल है और यह पूरे बाजार के रुख को प्रभावित कर सकता है।

एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि,

SEBI ने NSE और नारायण समेत कई शीर्ष अधिकारियों को इस संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके अलावा कुछ पूर्व शीर्ष प्रबंधकीय कर्मियों को भी उनकी निजी सुनवाई के जिए समन भेजे जाएंगे।

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आरोप है कि साझा-स्थान सुविधा में NSE के कुछ ब्रोकरों को बाजार से जुड़ी कुछ सूचनाएं बाकी ब्रोकरों से कथित तौर पर पहले मिल जाती थी जिसका उन्हें लाभ उठाया। कंप्यूटरजनित खरीद-बिक्री प्रणाली में अल्गोरिद्म के सूत्रों के आधार पर कंप्यूटर स्वत: खरीद-फरोख्त का ऑर्डर प्रस्तुत करते हैं। नियामकीय एजेंसियों और सरकार तथा एक्सचेंज के विभिन्न सूत्रों ने बताया कि NSE के निदेशक मंडल के भीतर और शेयरधारकों की ओर से दबाव बढ़ रहा है कि एक्सचेंज के कुछ बड़े और मध्यम स्तर के अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए।

हालांकि शीर्ष प्रबंधक अधिकारी से जुड़े करीबी सूत्रों ने बताया कि एक्सचेंज ने नारायण एवं अन्य को बाहर किए जाने के किसी भी कदम का जोरदार विरोध किया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसे पूर्णतया उलझन वाली स्थिति बताया और कहा कि एक कड़ा संदेश देने के लिए कड़ा कदम उठाया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि दुनिया को यह बताना नितांत आवश्यक है कि NSE अपनी स्वच्छ छवि को लेकर गंभीर है और किसी भी तरह की कमी पर पर्दा डालने के बजाय उस पर कार्रवाई करने में सक्षम है।

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हालांकि, NSE के प्रवक्ता ने इस संबंध में टिप्पणी देने से इंकार कर दिया और कहा, यह मामला अभी नियामक और NSE के बीच वार्ता का विषय है।

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