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सहारा ने संपत्ति की बिक्री के लिए बोली समयसीमा बढ़ाकर की 20 मई, खरीददारों में टाटा, गोदरेज और अडाणी शामिल

सहारा ने 30 संपत्ति की बिक्री के लिए बोली सीमा 20 मई तक के लिए बढ़ा दी है। बोली लगाने वाली कंपनियों ने संपत्तियों की जांच-पड़ताल के लिए कुछ और समय मांगा है।

Dharmender Chaudhary | Apr 30, 2017 | 4:27 PM
सहारा ने संपत्ति की बिक्री के लिए बोली समयसीमा बढ़ाकर की 20 मई, खरीददारों में टाटा, गोदरेज और अडाणी शामिल

नई दिल्ली। समस्या में फंसे सहारा समूह ने अपनी 30 संपत्ति की बिक्री के लिए बोली सीमा 20 मई तक के लिए बढ़ा दी है। इसका कारण है कि इन संपत्तियों में रूचि रखने वाली कंपनियों ने संपत्तियों की जांच-पड़ताल के लिए कुछ और समय मांगा है। संभावित खरीददारों में टाटा, गोदरेज और अडाणी जैसे संभावित खरीदार शामिल हैं। यह भी पढ़ें: देश में फोन यूजर्स की संख्या बढ़कर 1.18 अरब हुई, फरवरी में जारी हुए 1.37 करोड़ नए मोबाइल कनेक्शन

परामर्श कंपनी नाइट फ्रैंक सहारा की संपत्ति की नीलामी कर रही है जिसका मूल्य 7,400 करोड़ रुपए अनुमानित है। उच्चतम न्यायालय के संपत्ति बिक्री के निर्देश के बाद सहारा समूह यह कदम उठा रहा है। सूत्रों ने कहा कि भू-खंड और अन्य संपत्ति को लेकर संभावित खरीदारों में रूचि जगी है। संभावित खरीदारों में पतंजलि समूह और ओमेक्स और एलडेको समेत जमीन जायदाद के विकास से जुड़ी कंपनियां एवं धनाढ्य भारतीयों के साथ सार्वजनिक उपक्रम भी हैं। इसके अलावा चेन्नई स्थित अपोलो हास्पिटल ने भी लखनऊ में सहारा अस्पता के अधिग्रहण में रूचि दिखाई है।

सूत्रों के अनुसार नाइट फ्रैंक इंडिया को 250 रूचि पत्र प्राप्त हुए हैं। लेकिन इसमें रूचि रखने वाले पक्षों ने अंतिम बोली से पहले जांच-पड़ताल एवं अन्य औपचारिकताओं के लिए और समय मांगा है। इसके कारण समयसीमा बढ़ायी गई है। इस बारे में संपर्क किए जाने पर सहारा के प्रवक्ता ने समयसीमा बढ़ाए जाने की पुष्टि की। प्रवक्ता ने सवाल के जवाब में कहा, जांच-पड़ताल के लिए संभावित खरीदारों द्वारा और समय मांगे जाने के मद्देनजर हमने समयसीमा बढ़ाकर 20 मई 2017 कर दी है।

उल्लेखनीय है कि बाजार नियामक सेबी द्वारा विशेषग्य एजेंसियों की मदद के बावजूद सहारा की कुछ संपत्ति की नीलामी में कठिनाई जताने के बाद 28 फरवरी को उच्चतम न्यायालय ने सहारा को संपत्ति बेचने की अनुमति दी थी। सहारा ने बिक्री के लिए छह महीने का समय मांगा था लेकिन न्यायालय ने पूरी प्रक्रिया छह सप्ताह में पूरी करने को कहा। सहारा ने उसके बाद नाइट फ्रैंक को बिक्री प्रक्रिया पूरी करने के लिए नियुक्त किया।

नाइट फ्रैंक से 13 अप्रैल तक संपत्ति की बिक्री पूरी करने को कहा गया था ताकि उच्चतम न्यायालय के निर्देश के अनुसार समयसीमा का पालन हो सके लेकिन संभावित खरीदारों द्वारा समय मांगे जाने से ऐसा नहीं हो पाया। सहारा समूह की ये संपत्ति दिल्ली, पुणे, इंदौरान, लखनऊ, कोयंबटूर, चंडीगढ़, भोपाल, गुना, कोलकाता, हरिद्वार आदि जगहों पर स्थित हैं। यह भी पढ़ें: केंद्र सरकार ने NGT के डीजल वाहनों पर दिए ऐतिहासिक आदेश का किया विरोध, कहा – कानून के प्रावधानों से अलग है आदेश