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रियल एस्टेट, निर्माण क्षेत्र ने दिया अप्रैल में सबसे अधिक रोजगार, सस्‍ते मकानों के निर्माण से पैदा हुए अवसर

रियल एस्टेट उद्योग क्षेत्र रोजगार के मामले में अप्रैल माह में सबसे आगे रहे हैं। इस क्षेत्र में कुशल श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं।

Abhishek Shrivastava | May 10, 2017 | 9:18 PM
रियल एस्टेट, निर्माण क्षेत्र ने दिया अप्रैल में सबसे अधिक रोजगार, सस्‍ते मकानों के निर्माण से पैदा हुए अवसर

मुंबई। निर्माण कार्य और रियल एस्टेट उद्योग क्षेत्र रोजगार के मामले में अप्रैल माह में सबसे आगे रहे हैं। इस क्षेत्र में कुशल श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। लोगों के लिए सस्ते मकान उपलब्ध कराने के सरकार का एजेंडा आगे बढ़ाते हुए क्षेत्र वृद्धि के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

टाइम्स जॉब के नवीनतम रोजगार सूचकांक रिक्रूट-एक्स में यह बात कही गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार कुल प्रतिभा मांग  अप्रैल, 2017 में तीन फीसदी बढ़ी है। रियल एस्टेट में सात फीसदी, जबकि निर्माण क्षेत्र में छह फीसदी मांग बढ़ी है।

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टाइम्स जॉब कारोबार प्रमुख रामत्रेय कृष्णामूर्ति ने कहा कि हमारी रिक्रूट-एक्स रिपोर्ट भारतीय मध्य वर्ग और उसकी बढ़ती क्रयशक्ति दर्शाती है, जिसने अपना मकान होने के सपने को सस्ते घर की वास्तविक मांग में तब्दील कर दिया है। इन तत्वों को कारोबार अनुकूल माहौल तैयार करने के प्रधानमंत्री मोदी के अभियान के साथ मिलाकर देखा जाए तो इससे रियल एस्टेट क्षेत्र वृद्धि की ओर उन्मुख नजर आता है, जिससे इस क्षेत्र में नौकरियों का सृजन हो रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्माण और रियल एस्टेट अप्रैल, 2017 में भर्तियां करने में सबसे आगे तो चल ही रहे हैं, लॉजिस्टिक्स, पेट्रोरसायन, आईटी, दूरसंचार और बीएफएसई में भी बड़ी संख्या में नौकरियों के अवसर पैदा हो रहे हैं।

14 और राज्य रियल एस्टेट कानून को अधिसूचित करने की प्रक्रिया में  

रियल एस्टेट (नियमन एवं विकास) कानून को 14 राज्‍यों और संघ शासित प्रदेशों ने क्रियान्वित किया है। वहीं 14 अन्य राज्य इन नियमों को अधिसूचित करने की प्रक्रिया में हैं। आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजीव रंजन मिश्र ने कहा, इस कानून के तहत बने नियामक के पास मौजूदा रियल एस्टेट परियोजनाओं को जुलाई अंत तक पंजीकृत कराना होगा।

इस कानून का मकसद रातों रात गायब होने वाली कंपनियों से संपत्ति के खरीदारों को संरक्षण देना है। संसद ने इसे मार्च, 2016 में पारित किया। यह कानून इस महीने से अस्तित्व में आया है। जिन राज्‍यों और संघ शासित प्रदेशों ने इस कानून को अधिसूचित किया है उनमें आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, केरल, महाराष्ट्र, ओडि़शा, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, चंडीगढ़, दादर एवं नागर हवेली, दमन एवं दीव, दिल्ली और लक्षद्वीप शामिल हैं।

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