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ओला को 2015-16 में रोजाना 6 करोड़ रुपए का घाटा, एक रुपए कमाने के लिए खर्च किए 4 रुपए

Ola को वित्त वर्ष 2015-16 में 2311 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। विज्ञापन, प्रचार और कर्मचारियों पर भारी खर्च से रोजाना 6 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है।

Dharmender Chaudhary | Apr 30, 2017 | 4:06 PM
ओला को 2015-16 में रोजाना 6 करोड़ रुपए का घाटा, एक रुपए कमाने के लिए खर्च किए 4 रुपए

नई दिल्ली। सॉफ्टबैंक समर्थित कैब एग्रीगेटर ओला (Ola) को वित्त वर्ष 2015-16 में 2311 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। विज्ञापन, प्रचार और कर्मचारियों पर भारी खर्च के कारण कंपनी को रोजाना करीब 6 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है। बेंगलुरु स्थित फर्म ने कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय को बताया कि 2014-15 (796.11 करोड़ रुपए) के मुकाबले घाटा तीन गुना बढ़ गया है। यह भी पढ़ें: देश में फोन यूजर्स की संख्या बढ़कर 1.18 अरब हुई, फरवरी में जारी हुए 1.37 करोड़ नए मोबाइल कनेक्शन

ओला को चलाने वाली एएनआई टेक्नोलॉजीज के मुताबिक वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान कंपनी का रेवेन्यू बढ़कर 758.23 करोड़ रुपए पहुंच गया जो कि पिछले वित्त वर्ष में 103.77 करोड़ रुपए था। रिसर्च एंड अनालिटिक्स फर्म टोफलर की को-फाउंडर आंचल अग्रवाल ने कहा कि घाटे की वास्तविक राशि में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, लॉस मार्जिन में महत्वपूर्णरुप से कमी आई है। उन्होंने कहा कि 2014-14 में ओला एक रुपए में कमाने के लिए करीब 8.5 रुपए खर्च करती थी जो कि 2015-16 घटकर करीब 4 रुपए रह गई है। कंपनी ने हाल ही में जो इनसेंटिव्स खत्म किए हैं उससे संभव है कि लॉस मार्जिन में और कमी आई हो। अग्रवाल का मानना है कि लॉस मार्जिन आने वाले दिनों में घटकर 2-3 रुपए आ सकता है जो अन्य ई-कॉमर्स कंपनियों के तुलनीय है।

ओला ने अगस्त 2016 में अपनी टैक्सीऑरस्योर (टीएफएस) की सर्विस बंद कर दी। ओला ने इस कंपनी को 20 करोड़ डॉलर में खरीदने के 18 महीने के बाद बंद किया है। ओला ने रिटर्न फाइल करके बताया कि 2014-15 के मुकाबले कर्मचारियों का खर्च 5 गुना बढ़कर 461.60 करोड़ रुपए हो गया है जो कि 85.16 करोड़ रुपए था। इसी तरह, ओला ने विज्ञापन और प्रचार पर 99.84 करोड़ रुपए के मुकाबले 2015-16 में 437.89 करोड़ रुपए खर्च किए। यह भी पढ़ें: केंद्र सरकार ने NGT के डीजल वाहनों पर दिए ऐतिहासिक आदेश का किया विरोध, कहा – कानून के प्रावधानों से अलग है आदेश