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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के उपाध्यक्ष रवि नारायण ने छोड़ा पद, इस्तीफा चेयरमैन अशोक चावला को भेजा

NSE के फाउंडर मेंबर में शामिल रवि नारायण ने एक्सचेंज से बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोमवार देर रात अपना इस्तीफा NSE चेयरमैन अशोक चावला को भेजा था।

Ankit Tyagi | Jun 2, 2017 | 1:31 PM
 नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के उपाध्यक्ष रवि नारायण ने छोड़ा पद, इस्तीफा चेयरमैन अशोक चावला को भेजा

नई दिल्ली। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के फाउंडर मेंबर में शामिल रवि नारायण ने एक्सचेंज से बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने सोमवार देर रात अपना इस्तीफा NSE चेयरमैन अशोक चावला को भेजा था। आपको बता दें कि हाल में शेयर बाजार रेग्युलेटर SEBI ने रवि नारायण और NSE की पूर्व CEO चित्रा रामकृष्णनन और अन्य सदस्यों को एल्गोरिदम इश्यू पर कारण बताओं नोटिस भेजा था। यह भी पढ़े: एक महीने में 70 फीसदी तक गिरे इन शेयरों के भाव, अब क्या करें निवेशक

हो रहा था विरोध

नियामकी एजेंसियों और सरकार तथा एक्सचेंज के विभिन्न सूत्रों ने बताया कि एनएसई के निदेशक मंडल के भीतर और शेयरधारकों की ओर से दबाव बढ़ रहा है कि एक्सचेंज के कुछ बड़े और मध्यम स्तर के अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए। आपको बता दें कि पिछले साल दिसंबर में निदेशक मंडल के कुछ सदस्यों के साथ मतभेद के कारण चित्रा रामकृष्ण ने नेशनल स्टाक एक्सचेंज (एनएसई) के प्रबंध निदेशक और सीईओ के पद से से इस्तीफा दे दिया था। यह भी पढ़े: पेरिस समझौते से अलग हुआ अमेरिका, ट्रंप ने कहा- US इंडस्ट्री के लिए यह खराब और भारत चीन के लिए फायदेमंद

स्टॉक ब्रोकर्स को फायदा पहुंचाने का आरोप!

SEBI ने 10 दिसंबर 2012 से 30 मई 2014 के बीच कराई जांच में पाया गया था कि NSE कुछ बड़े स्टॉक ब्रोकर्स को अपने सर्वर में प्राथमिक पहुंच की सुविधा उपलब्ध कराता था। इससे ब्रोकर्स को फायदा पहुंचता था।

सेबी ने लिखा था लेटर

सेबी ने एनएसई के चेयरमैन अशोक चावला को लेटर लिखा था। यह लेटर कोलोकेशन के बारे में एक एक्सपर्ट कमिटी की रिपोर्ट के मद्देनजर लिखा गया। कोलोकेशन का संबंध ब्रोकरों से फीस लेकर उनके सर्वर एक्सचेंज के पास लगाने से है। ऐसा करने पर स्पीड के मामले में उन्हें दूसरों पर बढ़त मिल जाती है। चावला ने 9 सितंबर को लिखा गया पत्र मिलने की पुष्टि की। उन्होंने कहा, सेबी ने एनएसई बोर्ड से कहा है कि एक्सपर्ट कमिटी ने जो चिंताएं जताई हैं, उन पर गौर किया जाए और तीन महीने के अंदर जरूरी कदम उठाकर एक रिपोर्ट दी जाए। सेबी ने कहा है कि इस मामले में किसी भी सांठगांठ का पता लगाया जाए और इसके लिए जवाबदेही तय की जाए। यह भी पढ़े: मोदी ने रूस की कंपनियों को रक्षा व अन्य क्षेत्रों में निवेश का दिया न्योता, स्वतंत्र साख निर्धारण उद्योग का करेंगे विकास

 

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