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एन चंद्रशेखरन को पिछले साल TCS CEO के रूप में मिला 30 करोड़ रुपए का सैलरी पैकेज

टाटा संस के प्रमुख एन चंद्रशेखरन ने समूह की आईटी कंपनी TCS के CEO तथा प्रबंध निदेशक के रूप में 2016-17 में 30.15 करोड़ रुपए का सैलरी पैकेज लिया।

Ankit Tyagi | May 31, 2017 | 10:13 AM
एन चंद्रशेखरन को पिछले साल TCS CEO के रूप में मिला 30 करोड़ रुपए का सैलरी पैकेज

नई दिल्ली। टाटा संस के प्रमुख एन चंद्रशेखरन ने समूह की आईटी कंपनी TCS के CEO तथा प्रबंध निदेशक के रूप में 2016-17 में 30.15 करोड़ रुपए का सैलरी पैकेज लिया। उन्हें इस साल फरवरी में टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया। टाटा संस नमक से लेकर साफ्टेवयर बनाने वाले 103 अरब डालर के समूह की होल्डिंग कंपनी है।

मिला 30.15 करोड़ रुपए का सैलेरी पैकेज
कंपनी की 2016-17 की सालाना रिपोर्ट के अनुसार TCS के CEO के रूप में उन्होंने 2.44 करोड़ रुपए मूल वेतन लिया, 25 करोड़ रुपए कमीशन तथा 2.7 करोड़ रुपए भत्ते के रूप में लिए। वित्त वर्ष 2015-16 में चंद्रशेखरन को 25.6 करोड़ रुपए का वेतन पैकेज मिला था। इसके अलावा उन्हें एक बारगी विशेष बोनस के रूप में 10 करोड़ रुपए मिले थे। चंद्रशेखरन का स्थान राजेश गोपीनाथ ने लिया। वह पहले मुख्य वित्त अधिकारी थे। यह भी पढ़े: ONGC को पीछे छोड़ सार्वजनिक क्षेत्र में सबसे अधिक लाभ कमाने वाली कंपनी बनी IOC

‘गुमनाम’ एंप्लॉई ने किया ऐसा कमाल

शायद ही कोई ये जानता हो कि कभी TCS में ‘गुमनाम’ एंप्लॉई की तरह रहने वाले चंद्रशेखरन ने कैसे इतने बड़े मुकाम को हासिल किया। टाटा संस के नए चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन की शख्सियत की खूबी यह है कि वह जो ठान लेते हैं, उसे करके दिखाते हैं। शायद यही वह खूबी है, जिसने टीसीएस जैसी दिग्गज कंपनी के एक गुमनाम एंप्लॉई से उ‌न्हें पहले उसका चेयरमैन बनाया और अब वह देश के सबसे बड़े कॉरपोरेट हाउस के चेयरमैन बनने जा रहे हैं।

ऐसे सामने आया चंद्रशेखरन का टैलेंट

TCS के फॉर्मर वाइस चेयरमैन एस रामादोराई ने 1993 में चंद्रा का हुनर पहचाना और 1996 में उ‌न्हें अपना एग्जिक्यूटिव असिस्टेंट बनाया। रामादोराई ने बताया, ‘चंद्रा के बारे में कई लोगों, क्लाइंट और सहकर्मचारी से अच्छा फीडबैक मिला था। उनमें वर्ल्ड क्लास टीम और वैल्यू सिस्टम बनाने की योग्यता है।’ कुछ समय तक कंपनी के अंदर यह मजाक चलता रहा कि TCS का मतलब है- टेक चंद्रा सीरियसली। बहुत जल्द उन्होंने बिजनेस बढ़ाने की योग्यता कंपनी में साबित की। 1999 में उन्होंने ई-बिजनेस यूनिट शुरू की और उसे पांच साल के अंदर 50 करोड़ डॉलर तक पहुंचा दिया। 2002 में जीई से 10 करोड़ डॉलर की डील हासिल करके उन्होंने धाक जमा ली थी। यह किसी भारतीय कंपनी को मिली पहली 10 करोड़ डॉलर की डील थी। 2009 में रामादोराई के हटने के बाद वह टीसीएस के सीईओ बने। उनके बॉस रहने के दौरान कंपनी का रेवेन्यू 6.3 अरब डॉलर से बढ़कर 16.5 अरब डॉलर हो गया। यह भी पढ़े: एक ‘गुमनाम’ एंप्लॉई ने किया ऐसा कमाल, आज बन गया 9 लाख करोड़ रुपए के बिजनेस एंपायर का चेयरमैन

जनवरी में संभाली थी टाटा ग्रुप की कमान

टीसीएस के पूर्व सीईओ एन चंद्रशेखरन ने जनवरी में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाल था। टाटा समूह के 150 साल के इतिहास में इस पद के लिए चुने जाने वाले वह पहले गैर-पारसी हैं। सायरस मिस्त्री को पद हटाने के बाद उन्हें 12 जनवरी को टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया। आपको बता दें कि कि टाटा ग्रुप की 18 लिस्टेड कंपनियों पर 2.36 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। सायरस मिस्त्री और नुस्ली वाडिया के साथ कानूनी लड़ाई भी जारी है। टाटा स्टील पर कर्ज और यूरोप में रीस्ट्रक्चरिंग एक बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा टाटा टेली और एनटीटी डोकोमो के बीच विवाद, टाटा मोटर्स का कमजोर घरेलू कारोबार, एएलआर के कारोबार में उतार-चढ़ाव, टीसीएस के पास कैश की भरमार, इंडियन होटल्स का परफॉर्मेंस, टाटा ग्लोबल बेवरेजेज की यूरोप में स्ट्रेस्ड एसेट्स, कंपनियों का पेचीदा क्रॉस होल्डिंग स्ट्रक्चर, टाटा ट्रस्ट और टाटा ग्रुप के बीच रिश्तों में सुधार और बिजनेस से बाहर निकलने या निवेश या ग्रोथ पर फैसला ऐसे मसले हैं जिनसे  एन चंद्रशेखरन के निपटना होगा। यह भी पढ़े: साइंस के क्षेत्र में कैरियर बनाने वाले दुनिया भर के बच्चों की मदद करेगी TCS

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