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DoubleTrouble: अगले महीने ज्‍वाइन कर रहे हैं नई नौकरी तो सैलरी अकाउंट से जुड़ा यह नियम जानना है जरूरी

RBI के नियम के मुताबिक आप एक ही बैंक में दो सेविंग अकाउंट नहीं खोल सकते। इसलिए यदि आपकी कंपनी आपका सैलरी अकाउंट खोल रही है तो आप जरूर सावधानी बरतें।

Sachin Chaturvedi | May 28, 2017 | 5:52 PM
DoubleTrouble: अगले महीने ज्‍वाइन कर रहे हैं नई नौकरी तो सैलरी अकाउंट से जुड़ा यह नियम जानना है जरूरी

नई दिल्ली। इंदौर के रहने वाले कार्तिक पढ़ाई के सिलसिले में दिल्ली आए। साल 2011 में पढ़ाई खत्म करने के बाद उन्होंने एक जगह नौकरी करना शुरू कर दिया। कंपनी ने HDFC बैंक में उनका सैलरी अकाउंट खुलवा दिया। कुछ ही दिनों बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर दूसर कंपनी ज्‍वाइन कर ली। लेकिन जब यहां अकाउंट खोला तो उनके सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई। समस्या यह थी कि पुरानी कंपनी में भी उनका HDFC का अकाउंट खोला गया था, जिसे वो इस्तेमाल नहीं कर रहे थे, हालांकि वो चालू था। जब उन्होंने यह बात जाहिर किए बिना अपनी नई कंपनी में HDFC बैंक में नया खाता खोलने का आवेदन किया तो बैंक की तरफ से खाता खोलने के लिए मना कर दिया गया।

देश में ऐसे ही कई और कार्तिक होंगे जिन्होंने इस तरह की स्थिति का सामना किया होगा, लेकिन दरअसल इस परेशानी की अहम वजह आरबीआई के वो सख्त नियम हैं जिनके कारण बैंक ऐसा करने से मना कर देते हैं।  हम अपनी खबर में बताएंगे ऐसा क्यों होता है, जानिए क्या हैं आरबीआई के दिशानिर्देश।यह भी पढ़ें: घर बैठे मिल सकता है कार लोन, एप्‍लाई करने का यह है आसान तरीका

क्या है RBI का नियम

RBI मुताबिक अगर किसी बैंक में किसी ग्राहक का दूसरा सेविंग्स अकाउंट मिलता है, तो ऐसी स्थिति में उसे 30 दिनों के भीतर उस खाते को बंद करना होता है। एक बैंक में किसी व्यक्ति का एक सेविंग्स एकाउंट और एक करेंट अकाउंट हो सकते है। लेकिन सेविंग्स अकाउंट का यह नियम ज्वाइंट अकाउंट के ग्राहकों पर लागू नहीं होता। अगर पैन कार्ड नहीं है तो इस स्थिति में फॉर्म नंबर 60 भरना होगा जिसमें यह लिखना जरूरी होगा कि आपके पास पैन कार्ड नहीं है। बैंक अपने हर ग्राहक को एक यूनिक आईडी देता है। सिस्टम में पैन कार्ड नंबर डालते ही यह पता चल जाता है कि इस पैन का बैंक की किसी और ब्रांच में खाता है या नहीं। यह भी पढ़ें: ‘0’ % फाइनेंस स्‍कीम से शॉपिंग करने से पहले समझिए जीरो का गणित, महंगी पड़ सकती है शॉपिंग

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अगर आपके खुले हैं मल्टीपल एकाउंट्स

आरबीआई के नियमों के इतर देखें तो भी विभिन्‍न बैंकों में अकाउंट रखना किसी सिरदर्द से कम नहीं है। मल्टीपल बैंक अकाउंट होने की वजह से हर अकाउंट पर सालाना मेंटनेंस फीस और सर्विस चार्ज लगते हैं। इसके अलावा स्‍टेट बैंक आदि सरकारी बैंक में मिनिमम बैलेंस को जरूरी कर दिया गया है। प्राइवेट बैंक पहले से ही इसके लिए मोटी फीस वसूलते हैं। इसके अतिरिक्‍त आपको सबके यूजर आईडी और पासवर्ड भी याद रखवे पड़ते है। ATM के पिन भी रखने होते है। साथ ही अगर कभी आप डेबिट कार्ड खो जाता है या एकाउंट पासवर्ड भूल जाते हैं तो रिकवरी मुश्किल होती है।

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