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FCI के महाराष्ट्र स्थित गोदामों में देश का 90 फीसदी से ज्यादा खाद्यान्न हो रहा है खराब

FCI के गोदामों में खराब होने वाले खाद्यान्न का 90 फीसदी से अधिक हिस्सा महाराष्ट्र का है।

Manish Mishra | May 21, 2017 | 1:45 PM
FCI के महाराष्ट्र स्थित गोदामों में देश का 90 फीसदी से ज्यादा खाद्यान्न हो रहा है खराब

नई दिल्ली। देश में खाद्यान्न की कमी को दूर करने के लिये जहां एक ओर सरकार को आयात पर निर्भरता को बढ़ाना पड़ रहा है वहीं दूसरी ओर भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदामों में खाद्यान्न के खराब होने की मात्रा लगातार बढ़ रही है। FCI की ओर से सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत उजागर किए गए आंकड़ों में यह चौंकाने वाली बात सामने आयी है कि FCI के गोदामों में खराब होने वाले खाद्यान्न का 90 फीसदी से अधिक हिस्सा महाराष्ट्र का है। खराब होने के कारण उपभोग के लिये जारी नहीं किए जा सकने वाले खाद्यान्न की मात्रा से जुड़े पिछले छह साल के आंकड़ों में यह उजागर हुआ है।

आरटीआई कार्यकर्ता राम गुप्ता की आरटीआई के जवाब के मुताबिक साल 2016-17 में FCI के 25 राज्यों में मौजूद गोदामों में कुल 8679.39 मीट्रिक टन खाद्यान्न खराब हुआ। इसमें अकेले महाराष्ट्र में स्थित FCI के गोदामों में 7963.36 मीट्रिक टन खाद्यान्न को उपयोग में नहीं लाए जा सकने योग्य करार दिया गया। इसके बाद असम में 205.16 मीट्रिक टन खाद्यान्न खराब हुआ।

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खाद्यान्न खराब होने के मामले में पिछले सालों के आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि साल 2011-12 की तुलना में पिछले वित्त वर्ष तक खाद्यान्न खराब होने की मात्रा में लगातार इजाफा हुआ है। खासकर साल 2016-17 में साल 2011-12 की तुलना में ढाई गुने तक का इजाफा हुआ। आंकड़ों के मुताबिक साल 2011-12 में FCI के 25 राज्यों में स्थित गोदामों में कुल 3338.01 मीट्रिक टन खाद्यान्न खराब हुआ। इस साल भी महाराष्ट्र खाद्यान्न की खराबी में अव्वल रहा। यहां FCI के गोदामों में 1473 मीट्रिक टन खाद्यान्न अनुपयोगी करार दिया गया।

इसके बाद के सालों में खाद्यान्न खराब होने की मात्रा में गिरावट दर्ज की गई। साल 2012-13 में कुल खाद्यान्न की खराबी घटकर 3148.44 मीट्रिक टन रहने के बाद साल 2013-14 में यह आंकड़ा तेजी से बढ़कर 24695.46 मीट्रिक टन पर जा पहुंचा। इस साल FCI के कुल खराब हुए खाद्यान्न में आधा खाद्यान्न पश्चिम बंगाल में (12539.85 मीट्रिक टन) खराब हुआ। इसके अगले साल 2014-15 में उपभोग के लिये जारी नहीं किए जा सकने वाले खाद्यान्न की मात्रा घटकर 18847.23 मीट्रिक टन पर आ गई। हालांकि, उस साल खाद्यान्न खराब होने के मामले में ओडिशा (7108.81 मीट्रिक टन) अव्वल रहा।

पिछले छह सालों में खाद्यान्न की खराबी की मात्रा में तेजी से आए उतार-चढ़ाव के बारे में FCI के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसके लिए मौसम को अहम वजह बताया। इसमें दलील दी गई कि साल 2013-14 और 2014-15 में तमाम सूखा और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दायरे में अधिकांश राज्यों के आने के कारण FCI के गोदामों में खाद्यान्न की खराबी के आंकड़े में अनपेक्षित उछाल दर्ज किया गया। हालांकि, इसके बाद साल 2015-16 में तेजी से गिरावट दर्ज करते हुये यह आंकड़ा 18847 मीट्रिक टन से गिरकर 3115.68 मीट्रिक टन रह गया। इसमें सर्वाधिक हिस्सेदारी 2202.22 मीट्रिक टन (लगभग 70 प्रतिशत) आंध्र प्रदेश की रही।

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FCI के गोदामों में खाद्यान्न के खराब होने की समस्या गहराने के बीच मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और उत्तराखंड सहित लगभग दर्जन भर राज्य ऐसे भी हैं जिनमें खाद्यान्न खराब होने का आंकड़ा शून्य रहा है। साल 2016-17 में बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश सहित दस राज्यों में स्थित FCI के गोदामों में खाद्यान्न बिल्कुल खराब नहीं हुआ। इनमें हिमाचल प्रदेश और मणिपुर को मौसम के लिहाज से खाद्यान्न सुरक्षित रखने के लिये सर्वाधिक मुफीद राज्य माना गया है। दोनों राज्यों में पिछले छह सालों में उपभोग के लिये जारी नहीं किए जा सकने योग्य खाद्यान्न का स्तर शून्य रहा है।

वहीं हिमाचल प्रदेश की ही तरह ठंडी जलवायु वाले राज्य जम्मू कश्मीर में साल 2014-15 और अरणाचल प्रदेश में साल 2013-14 को छोड़कर शेष पांच सालों में खाद्यान्न खराब होने का आंकड़ा शून्य रहा। जबकि बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश में एफसीआई ने अपने गोदामों में खाद्यान्न सुरक्षा के बेहतर उपाय सुनिश्चित करते हुये खाद्यान्न खराब होने की दर को शून्य तक लाने में कामयाबी हासिल की है।

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