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अनिल अंबानी की इस कंपनी में 1 लाख रुपए लगाकर निवेशक बने करोड़पति, आपके पास भी मौका

अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कैपिटल का हिट म्यूचुअल फंड रिलायंस ग्रोथ है। जिसमें निवेशकों 1 लाख रुपए लगाकर एक करोड़ रुपए हासिल किया है।

Ankit Tyagi | Jun 4, 2017 | 7:02 AM
अनिल अंबानी की इस कंपनी में 1 लाख रुपए लगाकर निवेशक बने करोड़पति, आपके पास भी मौका

नई दिल्ली।  रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (RADA Group) के चेयरमैन अनिल अंबानी का आज जन्मदिन है। पिछले 3-4 दिन से अनिल अंबानी लगातार अखबारों की सुर्खियों में बन हुए है। दरअसल उनकी टेलीकॉम कंपनी रिलायंस कॉम्युनिकेशंस के बढ़ते कर्ज के बाद शेयर में आई गिरावट से निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। वहीं दूसरी ओर अनिल अंबानी के नेतृत्‍व वाली एक अन्‍य कंपनी रिलायंस कैपिटल के  रिलायंस ग्रोथ म्यूचुअल फंड ने निवेशकों को तगड़ा रिटर्न देकर मलामाल कर दिया है। अगर किसी निवेशक ने 1995 में इस फंड में 1 लाख रुपए लगाए होते तो आज उसके इस निवेश की कुल वैल्‍यू बढ़कर एक करोड़ रुपए हो जाती। हालांकि, एक्सपर्ट्स अभी भी मानते है कि यह फंड निवेशकों के लिए काफी बेहतर है और लॉन्ग टर्म में फिर से अच्छे रिटर्न मिल सकते हैं। यह भी पढ़े: अनिल अंबानी ने बड़े भाई मुकेश अंबानी के बारे में कहा- भाई के साथ अच्छे हैं रिश्ते

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निवेशक ऐसे बन गए करोड़पति

20 साल में सिर्फ एक लाख रुपए का निवेश एक करोड़ रुपए, जिन पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। हालांकि, इस पर यकीन नहीं होता, लेकिन इस इक्विटी फंड ने सचमुच पिछले 21 साल के दौरान 20 फीसदी वार्षिक से ज्यादा का CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) रिटर्न दिया है। रिलायंस कैपिटल असेट मैनेजमेंट के ओपन इंडेड इक्विटी ग्रोथ स्‍कीम रिलायंस ग्रोथ फंड ने 1000 रुपए की एनएवी (नेट असेट वैल्‍यू) हासिल कर ली है। म्‍यूचुअल फंड इंडस्‍ट्री का यह पहला फंड है, जिसकी एनएवी 1000 रुपए के ऊपर निकली है। इस फंड को 21 साल पहले अक्‍टूबर 1995 में लॉन्‍च किया गया था। यह भी पढ़े: अनिल अंबानी ने बताया RCom के कर्ज को कम करने का गणित, रणनीति बदलाव की योजना को कर्जदाताओं ने दी मंजूरी

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रिलायंस म्‍यूचुअल फंड के सीईओ संदीप सिक्‍का ने इस बड़े एचीवमेंट के बाद कहा था कि यह बेहद संतोषजनक है कि हमारे फंड में 1 लाख रुपए के इन्‍वेस्‍टमेंट की वैल्‍यू 1 करोड़ रुपए हो गई। इससे हमारा भरोसा और मजबूत हुआ कि म्‍यूचुअल फंड लॉन्‍ग टर्म वैल्‍थ क्रिएशन के लिए सबसे अच्‍छा इन्‍वेस्‍टमेंट ऑप्‍शन है।

21 साल में 100 गुना ग्रोथ

संदीप सिक्‍का ने कहा कि हमारे फंड की एनएवी की ग्रोथ 10 रुपए से बढ़कर 1000 रुपए हो गई। इसमें 21 साल में 100 गुना की ग्रोथ आई। इससे यह भी स्‍पष्‍ट है कि रिलायंस एमएफ जैसी 15-20 साल का लॉन्‍ग टर्म ट्रैक रिकॉर्ड रखने वाली असेट मैनेजमेंट कंपनियां मार्केट में उतार-चढ़ाव के बावजूद इन्‍वेस्‍टर के लिए अच्‍छी वेल्‍थ क्रिएट करती हैं। ऐसे में जो भी निवेशक फंड की शुरुआत से अभी तक जुड़ा हुआ है, उसके इन्वेस्टमेंट के रिटर्न पर 100 गुना की बढ़ोतरी हुई।

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फंड ने इन शेयरों में पैसा लगाकर की मोटी कमाई 

रिलायंस ग्रोथ फंड के पास छह लाख निवेशक हैं और 5000 करोड़ रुपए से ज्‍यादा का कॉर्पस है। मार्च र्क्‍वाटर तक रिलायंस म्‍यूचुअल फंड का असेट बेस 2,10,890 करोड़ रुपए था। रिलायंस ग्रोथ फंड एक मिड कैप ओरिएंटेड फंड है और इसने मुख्‍य रूप से फाइनेंशियल, इन्‍फॉर्मेशन टेक्‍नोलॉजी, इंडस्ट्रियल्‍स और हेल्‍थकेयर कंपनियों में इन्‍वेस्‍ट किया है। यह भी पढ़े: री-लॉन्च हुआ रिलायंस एंटरटेनमेंट का बिगफ्लिक्‍स, एक महीने फ्री में देख सकेंगे फिल्‍में

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कैसे होता है निवेशकों को फायदा

म्यूचुअल फंड्स के जरिए कई निवेशक से छोटी-छोटी रकम जुटा कर एक्सपर्ट्स रकम को मार्केट में इन्‍वेस्‍ट करते हैं। इससे आम निवेशकों का जोखिम काफी कम हो जाता है, वहीं छोटी रकम लगाने पर भी उन्हें बड़े एक्सपर्ट्स की सलाह का फायदा मिल जाता है। मार्केट में खुद निवेश करने की जगह म्यूचुअल फंड्स के जरिए निवेश करना कहीं ज्यादा आसान और सुरक्षित माना जाता है।

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छोटे निवेश पर आप भी पा सकते हैं बड़ा रिटर्न

बजाज कैपिटल के सीईओ अनिल चोपड़ा कहते है कि एसआईपी ( सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान), जो नियमित निवेश के लिए सबसे बढ़िया विकल्प है, इससे पावर ऑफ कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है। एसआईपी म्यूचुअल फंड में पैसे लगाने का सबसे आसान तरीका है। एसआईपी से जुड़े निवेश पर कोई एंट्री और एग्जिट लोड नहीं लगता है। लंबी अवधि में पैसे जोड़ने का सबसे अच्छा विकल्प एसआईपी है। वित्तीय लक्ष्य के हिसाब से एसआईपी करें। इससे पोर्टफोलियो के डाइवर्सिफिकेशन में मदद मिलती है। नए निवेशकों को एसआईपी से म्यूचुअल फंड में निवेश की शुरुआत करने की चाहिए।

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इन्वेस्टममेंट के समय हमेशा रखें ध्यान

इन्वेस्टर्स को ध्यान रखना चाहिए कि वो मार्केट की गिरावट पर एसआईपी बंद नहीं करें। गिरावट के समय कम भाव में ज्यादा यूनिट मिलती है। लंबी अवधि के लिए एसआईपी में बने रहने में ही फायदा है। एसआईपी को अपने को वित्तीय लक्ष्य के साथ जोड़ें। बैंक खाते के बजाय लिक्विड फंड में एसआईपी के लिए पैसे रखें। आमदनी बढ़ने पर निवेश की राशि जरूर बढ़ाएं और सिस्टमैटिक ट्रांसफर या विदड्रॉअल प्लान शुरू करें।

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