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वर्ल्‍ड बैंक ने भारत पर जताया भरोसा, कहा आर्थिक वृद्धि बनी रहेगी मजबूत

वर्ल्‍ड बैंक ने दक्षिण एशिया को वैश्विक वृद्धि का प्रमुख केंद्र बताया और कहा कि भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर मजबूत रहेगी

Abhishek Shrivastava | Oct 4, 2016 | 1:54 PM
वर्ल्‍ड बैंक ने भारत पर जताया भरोसा, कहा आर्थिक वृद्धि बनी रहेगी मजबूत

वॉशिंगटन। वर्ल्‍ड बैंक ने दक्षिण एशिया को वैश्विक वृद्धि का प्रमुख केंद्र बताया और कहा कि भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर मजबूत रहेगी और 2016 में इसके 7.6 प्रतिशत तथा 2017 में 7.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।

साउथ एशिया इकोनॉमिक फोकस पर कल जारी अपनी ताजा रिपोर्ट में वर्ल्‍ड बैंक ने कहा कि कृषि क्षेत्र में तेजी की उम्मीद, वेतन वृद्धि से खपत में बढ़ोतरी, निर्यात से सकारात्मक योगदान तथा निजी निवेश में सुधार की उम्मीद से भारत में जीडीपी वृद्धि 2016 में 7.6 प्रतिशत तथा 2017 में 7.7 प्रतिशत रहेगी।

  • भारत के समक्ष वृद्धि के साथ गरीबी में तेजी से कमी लाने, समावेशी विकास को बढ़ावा तथा स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा में सुधार एवं महिलाओं-पुरुषों में असमानता को दूर करने की चुनौती भी है।

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  • दक्षिण एशिया वैश्विक वृद्धि के लिहाज से प्रमुख केंद्र बना हुआ है और इसने चीन में नरमी, विकसित देशों में प्रोत्साहन नीति को लेकर अनिश्चितता तथा धन प्रेषण की गति धीमी होने जैसे वैश्विक प्रतिकूल हालात के बीच भी अपनी मजबूती को दिखाया है।
  • मुख्य चुनौती घरेलू स्तर पर बनी हुई है, जिसमें नीतियों में अनिश्चितता के साथ राजकोषीय तथा वित्तीय स्थिति का नाजुक होना शामिल हैं।
  • पाकिस्तान में मध्यम अवधि में आर्थिक गतिविधियों में धीरे-धीरे तेजी आने का अनुमान है और 2017 में जीडीपी वृद्धि 5.0 प्रतिशत तथा 2018 में 5.4 प्रतिशत रहेगी।
  • वर्ष 2016 में इसके साधन लागत पर 4.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है (बाजार मूल्य पर 5.7 प्रतिशत)।
  • विश्वबैंक ने कहा कि आतंरिक और बाह्य चुनौतियों के बावजूद बांग्लादेश में वृद्धि मजबूत बनी हुई है। वहां वृद्धि 2017 में 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो 2016 में 7.1 प्रतिशत के अनुमान से कम है।
  • भारत में जीएसटी के पारित होने जैसी प्रोत्साहन वाली नीतियों तथा वेतन वृद्धि के साथ अच्छे मानसून से इसे मदद मिलेगी।
  • भारत के समक्ष वृद्धि के साथ गरीबी में तेजी से कमी लाने, समावेशी विकास को बढ़ावा देने तथा स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा में सुधार एवं महिला-पुरुषों में असमानता को दूर करने की चुनौती है, जहां भारत की रैंकिंग अच्छी नहीं है।
  • रिपोर्ट के अनुसार अगर इन बाधाओं को दूर नहीं किया गया तो कमजोर निजी निवेश भारत की संभावित वृद्धि को नीचे ले जा सकता है।
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