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भारतीय रेलवे म्‍यांमार को निर्यात करेगी 18 डीजल इंजन, 200 करोड़ रुपए की होगी कमाई

भारतीय रेलवे जल्द म्यांमार को 18 आधुनिक डीजल इंजन का निर्यात करेगी। करीब 200 करोड़ रुपए मूल्य के इन इंजनों का विनिर्माण वाराणसी के में किया गया है।

Abhishek Shrivastava | May 25, 2017 | 8:11 PM
भारतीय रेलवे म्‍यांमार को निर्यात करेगी 18 डीजल इंजन, 200 करोड़ रुपए की होगी कमाई

नई दिल्‍ली। भारतीय रेलवे जल्द म्यांमार को 18 आधुनिक डीजल इंजन का निर्यात करेगी। करीब 200 करोड़ रुपए मूल्य के इन इंजनों का विनिर्माण वाराणसी के डीजल लोकोमोटिव वर्क्‍स (डीएलडब्ल्यू) में किया गया है। इनमें से पहले छह इंजनों का निर्यात अगले महीने किया जाएगा। शेष इंजनों की आपूर्ति इस साल दिसंबर तक होगी। यह भी पढ़ें:  वोडाफोन ने लॉन्‍च किए दो नए प्‍लान, प्रतिदिन 19 रुपए में मिलेगा 4G डाटा और अनलिमिटेड कॉल की सुविधा

म्यांमार रेलवे के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने हाल में आधुनिक फीचर्स के इन इंजनों का निरीक्षण किया था। प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई म्यांमार रेलवे के मैकेनिकल एवं इलेक्ट्रिकल विभाग के प्रमुख ने की। अत्याधुनिक डीएलडब्ल्यू द्वारा श्रीलंका, बांग्लादेश और मलेशिया सहित कई देशों को इंजनों का निर्यात किया जा रहा है। इन ऑर्डरों का क्रियान्वयन भारतीय रेलवे की निर्यात इकाई राइट्स द्वारा किया जा रहा है।

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए लिऑयन बैटरियों के घरेलू विकास, विनिर्माण को प्रोत्साहित करेगी सरकार 

सकार लीथियम-ऑयन बैटरियों का विनिर्माण भारत में ही करने के लिए विनिर्माताओं को प्रोत्साहन देने की योजना बना रही है। इस कदम से देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के दाम घट सकेंगे और चीन की कार कंपनियां भारतीय बाजार में प्रवेश को लेकर हतोत्साहित होंगी। यह भी पढ़ें:  मर्सिडीज बेंज ने अपने ‘Made in India’ मॉडल्‍स की कीमत 7 लाख रुपए तक घटाई, GST से पहले सस्‍ती हुईं कारें

केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री अनंत गीते ने कम लागत की लीथियम ऑयन बैटरियों का भारत में विकास करने की योजना का खुलासा करते हुए कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा विकसित बैटरी को नए सिरे से बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों में किया जा सके।

गीते ने बताया कि भेल के साथ विनिर्माण इकाई लगाने का प्रयास किया जा रहा है। इस पर 100 करोड़ रुपए का निवेश होगा। उन्‍होंने कहा कि सरकार ऐसी घरेलू कार कंपनियों को भी प्रोत्साहन देने पर विचार कर रही है, जो देश में लीथियम ऑयन बैटरियों के विनिर्माण के लिए सुविधाएं स्थापित कर रही हैं।

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