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मोदी सरकार ने उठाया डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी से पर्दा, भारतीय कंपनियां भी बनाएंगी सबमरीन और फाइटर प्लेन

मोदी सरकार ने तीन साल पूरे होने पर बुधवार को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग की नई पॉलिसी से पर्दा उठा दिया। अब भारतीय कंपनियां भी सबमरीन और फाइटर प्लेन बनाएंगी।

Ankit Tyagi | May 25, 2017 | 11:01 AM
मोदी सरकार ने उठाया डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी से पर्दा, भारतीय कंपनियां भी बनाएंगी सबमरीन और फाइटर प्लेन

नई दिल्ली। मोदी सरकार ने तीन साल पूरे होने पर बुधवार को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग की नई पॉलिसी से पर्दा उठा दिया। नई पॉलिसी के तहत सरकारी ऑर्डर्स में भारत में बने सामान को प्राथमिकता दी जाएगी। कैबिनेट की बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी  के तहत चार सब-सेक्टर्स को चुना गया है। इसमें 6 भारतीय कंपनियों को स्पेशल स्टेटस भी मिलेगा।

कैबिनेट बैठक में हुई चर्चा

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में नई पॉलिसी पर चर्चा हुई। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि कैबिनेट ने डिफेंस इक्विपमेंट के मामले में मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के प्रस्ताव पर विचार किया। स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप पॉलिसी के लिए चार सब-सेक्टर्स को चुना गया है। इसमें 6 भारतीय कंपनियों को स्पेशल स्टेटस मिलेगा। यह भी पढ़े: #ModiGoverment3Saal: मोदी के राज में विदेशी निवेशकों पर भारी पड़े घरेलू निवेशक, अब यहां है बड़े कमाई के मौके

भारतीय कंपनियां भी बनाएंगी सबमरीन और फाइटर प्लेन

नई पॉलिसी में घरेलू कंपनियों के जरिए मैन्युफैक्चरिंग पर जोर दिया गया है। घरेलू कंपनियां नौसेना के लिए सबमरीन, वायुसेना के लिए सिंगल इंजन फाइटर प्लेन और हेलिकॉप्टर्स और सेना के लिए आर्मर्ड व्हीकल्स बना सकेंगी। कंपनियों का पूल बनने के बाद उन्हें बड़े डिफेंस ऑर्डर्स की बोली लगाने का मौका भी दिया जाएगा, जो 20 अरब डॉलर से अधिक के हो सकते हैं। यह भी पढ़े #ModiGovernment3Saal: मोदी राज में निफ्टी छुएगा 10 हजार का स्तर, चुनिंदा शेयरों में बनेगा पैसा

घरेलू कंपनियों को 39000 करोड़ से अधिक के बिजनेस की ऑपर्च्युनिटी

कैबिनेट ने एक ऐसी पॉलिसी को भी मंजूरी दी है, जिसके मुताबिक 5 लाख रुपए से अधिक के सभी ऑर्डर्स में डोमेस्टिक सप्लायर्स को प्राथमिकता मिलेगी। इससे लोकल मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज कंपनियों को 39000 करोड़ रुपए से अधिक की बिजनेस ऑपर्च्युनिटी मिल सकती है। कैबिनेट के इस फैसले के दायरे में ऑटोनॉमस इंस्टीट्यूशंस, सरकारी कंपनियां और एंटिटीज और सरकार के नियंत्रण वाले संस्थान भी आएंगे।यह भी पढ़े: #ModiGoverment3Saal: मोदी के कार्यकाल में निवेशक हुए मालामाल, ऐसे 5 हजार रुपए लगाकर कमाए 3 लाख

50 लाख तक के सरकारी ऑर्डर के लिए घरेलू कंपनियां ही लगाएंगी बोली 

5 लाख रुपए से कम के ऑर्डर को इस पॉलिसी से बाहर रखा गया है। वहीं, 50 लाख रुपए तक या उससे कम के सरकारी ऑर्डर के लिए सिर्फ लोकल कंपनियां ही बोली लगा सकेंगी। ऑर्डर के लिए पर्याप्त लोकल कैपेसिटी और कॉम्पिटीशन है या नहीं, इस बारे में फैसला संबंधित मंत्रालय करेगा। Cabinet Decision: सरकार ने 25 वर्ष पुराने FIPB को समाप्त करने को दी मंजूरी, FDI नियमों को बनाया और आसान

50 लाख से बड़े ऑर्डर के लिए ये है नियम

ऑर्डर 50 लाख रुपए से अधिक का है और अगर उस क्षेत्र में पर्याप्त लोकल कॉम्पिटीशन नहीं है तो सबसे कम कॉस्ट वाली कंपनी को ऑर्डर मिलेगा। सबसे कम कॉस्ट वाला लोकल सप्लायर अगर सबसे कम बोली लगाने वाले के 20 फीसदी मार्जिन के दायरे में है तो कम कॉस्ट वाली कंपनी को सबसे कम बोली लगाने वाली एंटिटी का ऑफर मैच करने का मौका दिया जाएगा।

अगर कोई ऑर्डर ऐसा है जिसे कई कंपनियों में बांटा जा सकता है तो सबसे कम बोली लगाने वाले नॉन-लोकल सप्लायर को आधा ऑर्डर मिल सकता है। वहीं, बाकी काम लोकल सप्लायर को मिलेगा, बशर्ते वह सबसे कम बोली तक आने को तैयार हो। अगर ऑर्डर को कई कंपनियों में नहीं बांटा जा सकता है तो सबसे कम कॉस्ट वाली कंपनियों को काम मिलेगा, बशर्ते वह सबसे कम बोली की बराबरी करे।

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