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इनकम टैक्‍स विभाग ने 400 बेनामी सौदे पकड़े, 600 करोड़ रुपए की संपत्तियां की गईं कुर्क

इनकम टैक्‍स विभाग ने 240 मामलों में 400 से अधिक बेनामी सौदों का पता लगाया है और 600 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क की हैं।

Abhishek Shrivastava | May 24, 2017 | 7:58 PM
इनकम टैक्‍स विभाग ने 400 बेनामी सौदे पकड़े, 600 करोड़ रुपए की संपत्तियां की गईं कुर्क

नई दिल्ली। इनकम टैक्‍स विभाग ने 240 मामलों में 400 से अधिक बेनामी सौदों का पता लगाया है और 600 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क की हैं। इनकम टैक्‍स विभाग नया बेनामी कानून क्रियान्वित करना चाहता है, जिससे वांछित नतीजे जमीन पर दिखाई दें। इनकम टेक्‍स विभाग ने पिछले सप्ताह देशभर में 24 प्रतिबद्ध बेनामी प्रतिबंध इकाइयां (बीपीयू) स्थापित की हैं।

विभाग ने पिछले साल एक नवंबर से नए बेनामी सौदे (प्रतिबंध) संशोधन कानून, 2016 के तहत कार्रवाई करनी शुरू की थी। इस कानून में अधिकतम सात साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। चल और अचल, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष और मूर्त और अमूर्त संपत्ति यदि उसके वास्तविक लाभ प्राप्तकर्ता स्वामी के बजाये किसी अन्य के नाम पर हों, तो उसे बेनामी संपत्ति कहा जाता है। यह भी पढ़ें:  Cabinet Decision: सरकार ने FIPB को समाप्त करने की दी मंजूरी, देश में होगा फाइटर एयरक्राफ्ट और पनडुब्‍बी का निर्माण

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि आयकर जांच निदेशालय ने 23 मई, 2017 तक 400 से अधिक बेनामी लेनदेन की पहचान की थी। इनमें बैंक खातों में जमा, जमीन का टुकड़ा, फ्लैट और आभूषण शामिल हैं। बयान में कहा गया है कि कानून के तहत 240 से अधिक मामलों में अस्थायी रूप से संपत्तियों को कुर्क किया गया है। कुर्क की गई संपत्तियों का मूल्य 600 करोड़ रुपए बैठता है।

टैक्‍स विभाग ने कहा कि कोलकाता, मुंबई, दिल्ली, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में 40 से अधिक मामलों में अचल संपत्तियों को कुर्क किया गया है। मूल्य के हिसाब से ये संपत्तियां 530 करोड़ रुपए से अधिक की बैठती हैं। इसके अलावा विभाग ने भ्रष्ट व्यवहार के जरिये कमाए धन का पता लगाने के लिए पिछले एक महीने में 10 वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के परिसरों पर छापेमारी भी की है।

इसका ब्योरा देते हुए विभाग ने बताया कि जबलपुर में एक मामले में एक ड्राइवर के नाम 7.7 करोड़ रुपए की जमीन थी। इस जमीन की वास्तविक मालिक मध्य प्रदेश की सूचीबद्ध कंपनी और उसका नियोक्ता है। इसी तरह मुंबई में एक पेशेवर के पास कई अचल संपत्तियां थीं, जो मुखौटा कंपनियों के नाम पर खरीदी गई थीं। ये कंपनियां सिर्फ कागज पर थीं।

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