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ओला, उबर के ड्राइवर क्या उनके कर्मचारी हैं, उच्च न्यायालय करेगा फैसला

क्या एप आधारित टैक्सी सेवा देने वाली ओला और उबर के ड्राइवर या चालक इन कंपनियों के कर्मचारी हैं? दिल्ली उच्च न्यायालय में यह सवाल उठा।

Dharmender Chaudhary | May 8, 2017 | 9:35 PM
ओला, उबर के ड्राइवर क्या उनके कर्मचारी हैं, उच्च न्यायालय करेगा फैसला

नई दिल्ली। क्या एप आधारित टैक्सी सेवा देने वाली ओला और उबर के ड्राइवर या चालक इन कंपनियों के कर्मचारी हैं? दिल्ली उच्च न्यायालय में यह सवाल उठा। उच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर केंद्र का रख जानना चाहा है। न्यायमूर्ति संजीव सचदेव ने केंद्र सरकार के अलावा दिल्ली सरकार, उबर और ओला नाम से कैब सेवाएं देने वाली एएनआई टेक्नोलॉजीज को भी नोटिस दिया है। इस पर 10 अगस्त तक उनका जवाब मांगा है। यह मुद्दा ड्राइवरों की यूनियन ने उठाया था।

दिल्ली कमर्शियल ड्राइवर यूनियन ने आरोप लगाया था कि दोनों कंपनियां ड्राइवरों के साथ अपने कर्मचारी की तरह बर्ताव नहीं कर रही हैं और उनका शोषण कर रही हैं। यूनियन का दावा है कि डेढ़ लाख ड्राइवर उसके सदस्य हैं। यूनियन ने अपनी याचिका में कहा कि वेतन और सेवा शर्तों के मामले में ड्राइवरों का शोषण किया जा रहा है। उन्हें दुर्घटना या मृत्यु के मामलों में मुआवजे जैसे लाभों से वंचित किया जा रहा है। यह भी पढ़ें: दिसंबर तक 50 और डीलरशिप खोलेगी रेनो, बाजार हिस्सेदारी के मामले में पांचवीं सबसे बड़ी कार कंपनी बनी

दिल्ली सरकार ने सुनवाई के दौरान कहा कि जो मुद्दा उठाया गया है वह या तो औद्योगिक विवाद की श्रेणी में आता है या फिर प्रशासन द्वारा लिया गया नीतिगत फैसला है। वहीं केंद्र सरकार ने कहा कि ओला और उबर जैसी कंपनियों के नियमन के लिए मोटर वाहन कानून में संशोधन संबंधी विधेयक लोकसभा में पारित किया गया है। हालांकि, याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इस प्रस्तावित कानून में ड्राइवरों के समक्ष आ रही दिक्कतों को शामिल नहीं किया गया है। यह भी पढ़ें: भारत की ग्रोथ अगले साल 7.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद, खपत और बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ने से मिलेगा सहारा

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