1. Home
  2. News And Views
  3. News
  4. खाद्य नियामक का जंकफूड पर शिकंजा, समिति ने टैक्स लगाने और विज्ञापन बंद करने का दिया सुझाव

खाद्य नियामक का जंकफूड पर शिकंजा, समिति ने टैक्स लगाने और विज्ञापन बंद करने का दिया सुझाव

अधिक चिकनाई, चीनी और नमक वाली खाने पीने की चीजें बनाने वालों पर खाद्य नियामक की एक समिति की पैनी निगाह है। टैक्स लगाने और विज्ञापन बंद करने की वकालत की है।

Dharmender Chaudhary | May 9, 2017 | 7:04 PM
खाद्य नियामक का जंकफूड पर शिकंजा, समिति ने टैक्स लगाने और विज्ञापन बंद करने का दिया सुझाव

नई दिल्ली। अधिक चिकनाई, चीनी और नमक वाली खाने पीने की चीजें बनाने वालों पर खाद्य नियामक एफएसएसएआई की एक समिति की पैनी निगाह है। इस समिति ने ऐसे उत्पादों पर कर लगाने, ठप्पा लगाने के नियम कठोर करने और बच्चों के कार्यक्रमों के दौरान इनके विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने जैसे तमाम उपायों की सिफारिश की है। यह भी पढ़ें: अपने सदस्‍यों के लिए मकान नहीं बनाएगा EPFO, सिर्फ इस काम में करेगा सहायता : दत्तात्रेय

वसा चिकनाई, चीनी और नमक (एफएसएस) की खपत और भारतीय आबादी के स्वास्थ्य पर होने वाले प्रभाव विषय पर 11 सदस्यीय समिति की इस रिपोर्ट में अस्वास्थ्यकर खाद्य उत्पादों की खपत को कम करने की जरूरत बतायी गई ताकि कैंसर और मधुमेह जैसे गंभीर बीमारियों का जोखिम कम हो। एफएसएसएआई ने इस समिति में चिकित्सा, पोषण और आहार क्षेत्र जैसे विभिन्न क्षेत्रों तथा प्रख्यात मेडिकल शोध एवं अकादमी संस्थानों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया था।

एफएसएसएआई ने कहा, रिपोर्ट में संतुलित भोजन के बारे में एक सिफारिश की है उसमें कुल कैलोरी में से करीब 60 से 70 प्रतिशत कार्बोर्हाइड्रेट से, 10 से 12 प्रतिशत प्रोटीन से और 20 से 30 प्रतिशत कैलोरी वसा से हासिल होना चाहिए। समिति नले अत्यधिक प्रसंस्कृत जिंसों खाद्य उत्पादों और चीनी वाले पेय पदार्थों पर अधिक ऊंची दर से कर लगाने की सिफारिश की है। उसका मानना है कि ऐसे उत्पादों का उपभोग कम करने का यह एक व्यावहारिक उपाय हो सकता है।

उसने कहा है कि चिली जैसे देशों में बच्चों के टीवी कार्यक्रमों और शो पर ऐसे उत्पादों का विग्यापन पूरी तरह प्रतिबंधित है। भारत में भी इस दिशा में कमद बढ़ाना चाहिए।  यह रिपोर्ट प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के जरिये वसा, चीनी और नमक की खपत को कम करने में उद्योग जगत, एफएसएसएआई और उपभोक्ताओं सहित सभी अंशधारकों के लिए दिशानिर्देशक दस्तावेज की तरह हो सकती है। इसमें अधिक चीनी, नमक और चिकनाईर् वाले उत्पादों की दैनिक जीवन में खपत कम करने पर बल दिया गया है। यह भी पढ़ें: भारत की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2018-19 में 7.7 प्रतिशत पहुंचने की उम्मीद, खत्म होगा नोटबंदी का असर

Write a comment