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डीजीसीए का अदालत में दावा, एयरलाइंस यात्रियों से नहीं वसूलतीं मनमाना किराया

डीजीसीए ने दिल्ली उच्च न्यायालय में दावा किया कि देश में किसी राज्य में आंदोलन के समय एयरलाइंस यात्रियों से अत्यधिक और मनमाना किराया नहीं वसूलती हैं।

Dharmender Chaudhary | May 7, 2017 | 4:39 PM
डीजीसीए का अदालत में दावा, एयरलाइंस यात्रियों से नहीं वसूलतीं मनमाना किराया

नई दिल्ली। नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने दिल्ली उच्च न्यायालय में दावा किया कि देश में किसी राज्य में आंदोलन के समय एयरलाइंस यात्रियों से अत्यधिक और मनमाना किराया नहीं वसूलती हैं। डीजीसीए ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गीता मित्तल की अगुवाई वाली पीठ से यह बात कही। अदालत उस याचिका की सुनवाई कर रही थी जिसमें देशभर में विमान किरायों की सीमा तय करने की अपील की गई है जिससे यात्रियों से विमानन कंपनियां मनमाना किराया नहीं वसूल सकें। यह भी पढ़ें: ड्राइवरों को ट्रेंड करने के लिए सरकार खोलेगी 100 प्रशिक्षण केंद्र, मिलेगा 15,000 प्रति माह का स्‍टाइपेंड

याचिका का विरोध करते हुए डीजीसीए ने अदालत से कहा कि आपात स्थिति में सड़क और रेल यातायात प्रभावित होता है और सिर्फ हवाई परिवहन उपलब्ध होता है। ऐसे में विमान यात्रा की मांग कई गुना बढ़ जाती है जिसकी वजह से किरायों में इजाफा होता है। डीजीसीए ने अदालत में दिए हलफनामे में हालांकि इन आरोपों का खंडन किया कि विमानन कंपनियां यात्रियों से मनमाना किराया वसूलती हैं। यह भी पढ़ें: नहीं बता सकते कि विज्ञापन में PM मोदी की तस्वीरों के इस्तेमाल के लिए किन कंपनियों ने ली मंजूरी : PMO

डीजीसीए ने इन आरोपों को तर्कहीन बताते हुए कहा कि किराया दरों की निगरानी बाजार ताकतों, उपलब्धता और परिस्थितियों के हिसाब से तय होती हैं। अदालत ने इस बारे में याचिका में किए गए दावे के आधार पर नियामक को नोटिस जारी किया था, जिस पर नियामक ने अपनी प्रतिक्रिया में यह बात कही।

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