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सालभर में बैंकिंग म्यूचुअल फंड्स ने दिया 18% का सबसे ज्यादा रिटर्न, आगे भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद

बैंकिंग इक्विटी म्यूचुअल फंड्स ने 1 साल में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है। बीते एक साल में बैंकिंग इक्विटी फंड ने 18 फीसदी का रिटर्न दिया है।

Ankit Tyagi | Jan 14, 2017 | 9:54 AM
सालभर में बैंकिंग म्यूचुअल फंड्स ने दिया 18% का सबसे ज्यादा रिटर्न, आगे भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद

नई दिल्ली। पिछले एक साल से देश के बैंकिंग सेक्टर की हालत भले ही ठीक न हो, लेकिन बैंकिंग इक्विटी म्यूचुअल फंड्स ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है। बीते एक साल में बैंकिंग इक्विटी फंड ने 18 फीसदी का रिटर्न दिया है। जबकि दूसरे अन्य फंड्स इस रिटर्न के मामले में डबल डिजिट में भी नहीं पहुंच पाए। एक्सपर्ट्स का मानना है कि घरेलू इकनॉमिक रिकवरी तेज होने का सबसे ज्यादा फायदा बैंकिंग सेक्टर को मिलेगा। साथ ही, बैंकों की एसेट क्वॉलिटी लगातार बेहतर हो रही है। लिहाजा निवेशक लॉन्ग टर्म के लिए बैंकिंग इक्विटी फंड पर दांव लगा सकते है।

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बैंकों के लिए खत्म हुआ बुरा दौर

वैल्यू रिसर्च के सीईओ धीरेंद्र कुमार ने बताया, ‘पिछले एक साल में सभी सरकारी बैंकों के शेयरों ने आकर्षक स्तर पर आ गए है। माना जा रहा है कि बैड लोन के मामले में बैंकों का बुरा वक्त खत्म हो गया है। शेयर प्राइस में गिरावट के चलते अभी भी कई सरकारी बैंक सस्ते वैल्यूएशन पर मिल रहे हैं।

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आगे भी बैंकिंग म्यूचुअल फंड्स में अच्छे रिटर्न की उम्मीद

  • बजाज कैपिटल के डायरेक्टर अनिल चोपड़ा ने हाल में एक इंटरव्यु में कहा था कि जब देश में इकोनॉमिक ग्रोथ तेज होती है, तब बैंकिंग सेक्टर का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहता है।
  • उन्होंने बताया, ‘निवेशक तीन साल के लिए बैंकिंग फंड्स में निवेश कर सकते हैं। वे म्यूचुअल फंड्स में जितना निवेश करते हैं, उसका 5-10 फीसदी इनमें लगाया जा सकता है।
  • बैंकिंग फंड्स से आगे चलकर दूसरे फंड्स की तुलना में अधिक रिटर्न मिल सकता है। चोपड़ा ने बताया, बैंकों की एसेट क्वॉलिटी से जुड़ी फिक्र भी कम हो रही है, लेकिन नोटबंदी के चलते एक या दो तिमाही तक उनके मार्जिन में कमी आ सकती है।

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बैंकिंग सेक्टर में इसलिए आई थी गिरावट

  • रिजर्व बैंक के एसेट क्वॉलिटी रिव्यू शुरू करने के बाद बैंकिंग शेयरों की पिटाई हुई थी। हालांकि, अब उनकी बैड लोन की प्रॉब्लम कम हो रही है और इस वजह से बैंकिंग फंड्स ने बढ़िया रिटर्न दिया है।
  • कई सरकारी बैंक अभी भी बुक वैल्यू से कम पर ट्रेड कर रहे हैं।
  • एसेट क्वॉलिटी रिव्यू इसलिए किया गया था ताकि बैंकों की तरफ से दिए गए लोन के जोखिम का पता लगाया जा सके।
  • इसके चलते बैंकों को कई लोन एकाउंट्स को बैड लोन बताना पड़ा और उसके लिए प्रोविजनिंग यानी मुनाफे का कुछ हिस्सा अलग करना पड़ा। इससे बैंकों के मुनाफे में गिरावट आई। हालांकि, इससे उनकी बैलेंस शीट भी साफ-सुथरी हुई है।

बैंकिंग सेक्टर इस साल रहेगा स्टेबल

  • मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस ने भी हाल में कहा था कि भारतीय बैंकों के लिए एसेट ट्रेंड स्टेबल रहने की उम्मीद है। उसने कहा था कि कंपनियों की बैलेंस शीट भले ही कमजोर है, लेकिन उनके डेट इक्विटी और इंटरेस्ट कवरेज रेशियो में सुधार हो रहा है।
  • पिछले एक साल में बीएसई बैंकेक्स इंडेक्स 15 फीसदी चढ़ा है, जबकि इस दौरान सेंसेक्स में 7.65 फीसदी की तेजी आई है।
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